देहरादून। उत्तराखंड को नया राज्यपाल मिल गया है। नवनियुक्त राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को देहरादून स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रदेश के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। डॉ. बिसेन ने पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) का स्थान लिया है।
शपथ ग्रहण समारोह से पहले मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राष्ट्रपति की ओर से जारी नियुक्ति अधिपत्र पढ़कर सुनाया। इसके बाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने डॉ. बिसेन को राज्यपाल पद की शपथ दिलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को उन्हें उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया था।
मध्य प्रदेश की राजनीति में रहा लंबा अनुभव
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ था। पेशे से चिकित्सक और कृषक डॉ. बिसेन भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं और मध्य प्रदेश की राजनीति में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
वह वर्ष 1990 से 2008 के बीच चार बार मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। अपने राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उनके पास वन, परिवहन एवं खनिज तथा स्कूल शिक्षा एवं जेल विभागों की जिम्मेदारी रही। इसके बाद मई 2019 में वह 17वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत
उत्तराखंड पहुंचने पर डॉ. बिसेन का जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया। इस दौरान पुलिस की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और उन्होंने परेड का निरीक्षण किया। एयरपोर्ट पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
इसके बाद लोक भवन पहुंचने पर राज्यपाल के सचिव रविनाथ रामन, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल केके शुक्ल, सचिव प्रोटोकॉल विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप, आईजी विम्मी सचदेवा रामन और अपर सचिव रीना जोशी सहित अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
संवैधानिक प्रमुख के रूप में संभाली जिम्मेदारी
डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति के साथ उत्तराखंड में राज्यपाल का पदभार नए संवैधानिक प्रमुख ने संभाल लिया है। मध्य प्रदेश में विधायक, मंत्री और सांसद के रूप में काम करने का उनका लंबा अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष रहा है। अब राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका राज्य के संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन से जुड़ी होगी।

