back to top
Wednesday, August 5, 2026
Homeउत्तराखंड‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से पायलट परियोजना...

‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से पायलट परियोजना तैयार करने को कहा

  • बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल-डीजल नहीं देने का सुझाव.
  • कैमरों से पहचान कर ई-चालान भेजने के निर्देश.

नई दिल्ली। देश में बिना वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू करने की संभावना पर एक पायलट परियोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। इसके तहत वैध थर्ड पार्टी बीमा नहीं होने पर वाहनों को पेट्रोल पंपों से ईंधन नहीं देने का प्रस्ताव रखा गया है।

न्यायमूर्ति संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में वाहन बिना अनिवार्य बीमा के चल रहे हैं, जिससे मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 146 का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। अदालत ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ितों को मुआवजा मिलने में भी ऐसी स्थिति बड़ी बाधा बनती है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों और अन्य निगरानी कैमरों का उपयोग कर बिना बीमा वाले वाहनों की पहचान की जाए। ऐसे वाहनों के मालिकों को इलेक्ट्रॉनिक चालान (ई-चालान) भेजने की व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि देश में लगभग 56 प्रतिशत वाहन, जिनमें अधिकांश दोपहिया वाहन शामिल हैं, वैध बीमा के बिना चल रहे हैं। अदालत ने इसे सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों के लिए गंभीर चुनौती बताया।

फिलहाल अदालत ने ‘नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल’ व्यवस्था को तत्काल लागू करने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि केंद्र सरकार से इसकी व्यवहारिकता का अध्ययन कर पायलट परियोजना तैयार करने को कहा है। यदि यह योजना लागू होती है, तो बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल मिलने पर रोक लग सकती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments