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Sunday, September 20, 2026
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लोक साहित्य संरक्षण के लिए दिनेश रावत को ‘श्रम श्री साहित्य सम्मान’

देहरादून। रवांई क्षेत्र की लोक संस्कृति, लोक साहित्य और रवांल्टी लोकभाषा के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान के लिए साहित्यकार दिनेश रावत को ‘श्रम श्री साहित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ की ओर से संस्कृति विभाग के प्रेक्षागार, देहरादून में आयोजित ‘श्रम श्री साहित्य एवं नाट्य सम्मान समारोह’ में प्रदान किया गया।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राकेश टण्डन ने दिनेश रावत को अंगवस्त्र, स्मृति-चिह्न, सम्मान-पत्र और पुष्पमाला भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल, भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रवीर गायत्री, प्रदेश महामंत्री राजीव थपलियाल सहित अनेक साहित्यकार, नाट्यकर्मी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

दिनेश रावत लंबे समय से रवांई क्षेत्र की लोक परंपराओं, लोकदेवताओं, लोकगाथाओं, लोकभाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘रवांई क्षेत्र के लोकदेवता एवं लोकोत्सव’, ‘रवांई के देवालय एवं देवगाथाएँ’, ‘रवांल्टी शब्दकोश’, ‘का न हन्दू’, ‘माटी’, ‘तेरे जाने के बाद’ और ‘पहाड़ बनते पहाड़’ शामिल हैं। उनकी रचनाओं और वार्ताओं का प्रसारण दूरदर्शन उत्तराखण्ड और आकाशवाणी देहरादून से भी हो चुका है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद दिनेश रावत ने कहा कि लोक साहित्य, लोकसंस्कृति और मातृभाषा की सेवा के लिए मिला यह सम्मान उनके लिए मातृभूमि का आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए और अधिक समर्पण एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा।

समारोह के दौरान उत्तराखण्ड की लोकगाथा पर आधारित गढ़वाली नाटक ‘दुर्पदा की लाज’ का मंचन भी किया गया। कार्यक्रम में डॉ. नंदकिशोर हटवाल, डॉ. अतुल शर्मा, श्री स्नेही और नाट्यकार श्रेयश डोभाल सहित कई साहित्यकारों और नाट्यकर्मियों को भी सम्मानित किया गया।

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