नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद (एमएलसी) चुनावों की मतगणना के बीच राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 23 अक्टूबर को हुए मतदान के बाद चार राज्यों की कुल 28 सीटों के लिए वोटों की गिनती जारी है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल हैं।
मतगणना के दौरान कई सीटों पर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जबकि महाराष्ट्र में महायुति और महा विकास अघाड़ी के बीच भी दिलचस्प संघर्ष जारी है। 28 अक्टूबर को सुबह 11:45 बजे तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कई सीटों के परिणाम घोषित हो चुके थे, जबकि कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना जारी थी।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच मुकाबलापुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना के दौरान स्मिता जाधव को 1,20,427 वोट मिले, जबकि हर्षदा जाधव को 1,11,279 वोट प्राप्त हुए। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर के निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार प्रतापसिंह पाटिल ने शुरुआती राउंड में बढ़त का दावा किया। मराठवाड़ा में भी विभिन्न दलों के उम्मीदवारों के बीच उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कई सीटों पर अंतिम परिणाम आने तक राजनीतिक दलों की निगाहें मतगणना पर टिकी रहीं।
चुनावी नतीजों का राजनीतिक महत्व
चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों के नतीजे क्षेत्रीय राजनीतिक दलों और राष्ट्रीय दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला, बिहार में जन सुराज और राजद का प्रदर्शन, कर्नाटक में भाजपा-जद(एस) गठबंधन की बढ़त तथा महाराष्ट्र में महायुति और विपक्ष के बीच संघर्ष ने इन चुनावों को खास बना दिया है।
इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं की भूमिका अहम रही। खासकर उत्तर प्रदेश में सपा नेताओं ने परिणामों को आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया, जबकि भाजपा ने अपने प्रदर्शन को संगठनात्मक मजबूती का संकेत माना।
हालांकि, विधान परिषद चुनावों के परिणामों को सीधे विधानसभा चुनावों के जनादेश के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इन निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग और चुनावी प्रक्रिया अलग होती है। इसके बावजूद, ये नतीजे राजनीतिक दलों के संगठन, स्थानीय प्रभाव और मतदाता समर्थन का आकलन करने का अवसर देते हैं।

