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Tuesday, May 5, 2026
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Uttarakhand : गोद दिए गांव की प्रधान बनी 21 साल की प्रियंका, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की बात, कहा- मिलकर करेंगे काम

गैरसैंण (चमोली)। मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट में हुए पंचायत चुनाव में 21 वर्षीय प्रियंका नेगी ने ग्राम प्रधान पद पर जीत दर्ज की है। इस ऐतिहासिक जीत के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं प्रियंका को फोन कर बधाई दी और कहा कि वे गांव के विकास के लिए सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग करेंगे। मुख्यमंत्री ने सारकोटवासियों को भी शानदार चुनाव प्रक्रिया के लिए बधाई दी और ग्राम वासियों की भागीदारी को लोकतंत्र की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण को प्रदेश के मॉडल गांव के रूप में चुना गया है। इस दिशा में विकास कार्य तेज गति से चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले के वरिष्ठ अधिकारी शीघ्र ही गांव का निरीक्षण करेंगे। सीएम धामी ने प्रियंका नेगी से अपील की कि वे गांव की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएं। उन्होंने प्रियंका को देहरादून आमंत्रित भी किया।

गैरसैंण ब्लॉक के तहत आने वाले सारकोट गांव की नव निर्वाचित प्रधान प्रियंका नेगी ने अपनी प्रतिद्वंदी प्रियंका देवी को 421 बनाम 235 मतों के अंतर से हराया। प्रियंका नेगी गैरसैंण महाविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में स्नातक हैं और हाल ही में उनका परिणाम घोषित हुआ है। उनकी इस जीत के साथ वह क्षेत्र की सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान बन गई हैं। प्रियंका नेगी के पिता राजे सिंह नेगी भी वर्ष 2014 से 2019 तक सारकोट गांव के प्रधान रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी के साथ मिलकर गांव के समग्र विकास में पूर्ण सहयोग करेंगे।

सारकोट बना राज्य के लिए मॉडल

सारकोट गांव चमोली जिले के सबसे बड़े गांवों में से एक है, जहां वर्तमान में 300 से अधिक परिवार निवास करते हैं। गांव में पलायन न होने और सामाजिक सक्रियता के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भराड़ीसैंण से इस गांव को मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम घोषित किया था। तब से लेकर अब तक गांव में कई विकास योजनाएं चलाई जा रही हैं।

प्रियंका ने अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा, “मुख्यमंत्री की ओर से चल रहे विकास कार्यों को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही गांव की महिलाओं को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।” सारकोट में यह जीत सिर्फ एक पंचायत चुनाव नहीं, बल्कि युवा नेतृत्व और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।

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