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Tuesday, September 29, 2026
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शेयर बाजार में हफ्ते की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 900 अंक तक टूटा

  • निफ्टी 23 हजार के नीचे.
  • कच्चे तेल की तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव.

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को सप्ताह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 900 अंकों से अधिक टूटकर 73 हजार के स्तर से नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 50 भी 23,000 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर इंडिया VIX पर भी दिखा, जिसमें करीब 6 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।

इससे पहले शुक्रवार को घरेलू बाजार में सुधार देखने को मिला था। सेंसेक्स 315.20 अंक यानी 0.43 फीसदी की बढ़त के साथ 73,895.74 पर और निफ्टी 77.40 अंक यानी 0.34 फीसदी चढ़कर 23,140.50 पर बंद हुआ था। हालांकि, यह तेजी बाजार की लगातार सात सप्ताह की गिरावट का सिलसिला नहीं रोक सकी।

क्यों दबाव में आया बाजार?

बाजार में सोमवार की गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक एक साथ काम कर रहे हैं। इनमें भूराजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी प्रमुख हैं। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में भी इन कारकों पर निवेशकों की नजर रहेगी।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी खास तौर पर भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बड़ी वजह

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा कमजोर की है। एनएसडीएल के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से करीब 17,131 करोड़ रुपये निकाले हैं। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशक खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन विदेशी बिकवाली का दबाव बाजार पर बना हुआ है।

इसके अलावा अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5 फीसदी से ऊपर रहना भी उभरते बाजारों के लिए चुनौती बना हुआ है। ऊंची अमेरिकी यील्ड के कारण वैश्विक निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं, जिससे भारत जैसे बाजारों में पूंजी प्रवाह प्रभावित होता है।

इंडिया VIX में तेजी से बढ़ी अस्थिरता

इंडिया VIX में करीब 6 फीसदी की तेजी बाजार में बढ़ती अस्थिरता का संकेत देती है। VIX को आम तौर पर बाजार की अपेक्षित उतार-चढ़ाव की स्थिति का संकेतक माना जाता है। इसका बढ़ना यह बताता है कि निवेशक निकट अवधि में बाजार को लेकर अधिक अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं।

हालांकि, VIX की तेजी अपने आप में बाजार की आगे की दिशा तय नहीं करती। वास्तविक दिशा वैश्विक घटनाक्रम, तेल की कीमतों, विदेशी पूंजी प्रवाह और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

आगे किन संकेतकों पर रहेगी नजर?

इस सप्ताह बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की चाल अहम संकेतक रहेंगे। विश्लेषकों के मुताबिक भू-राजनीतिक तनाव कम होने और तेल की कीमतों में नरमी आने पर बाजार धारणा में सुधार हो सकता है, जबकि इसके उलट घटनाक्रम से अस्थिरता बढ़ सकती है।

अक्टूबर में प्रवेश से पहले बाजार के लिए यह सप्ताह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण शेयर बाजार बंद रहेगा। ऐसे में कारोबारी सप्ताह छोटा रहेगा और वैश्विक घटनाक्रमों पर बाजार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।

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