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Thursday, September 3, 2026
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राम मंदिर के नए सीईओ जितेंद्र मिश्र के सामने बड़ी चुनौती, पारदर्शिता से लेकर सुगम दर्शन तक की जिम्मेदारी

अयोध्या। राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के साथ ही उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। हाल ही में सामने आई चढ़ावा चोरी की घटना के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत करने और मंदिर की वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की होगी।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने करीब दो महीने की चयन प्रक्रिया के बाद जितेंद्र मिश्र को सीईओ नियुक्त किया है। देवरिया के मूल निवासी मिश्र भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्ष तक सेवा दे चुके हैं। विषम परिस्थितियों में काम करने और बड़े स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था संभालने का उनका अनुभव अब राम मंदिर की व्यवस्थाओं में उपयोगी साबित हो सकता है।

चढ़ावा व्यवस्था में पारदर्शिता सबसे अहम

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं और चोरी की घटना ने मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। मामले की जांच में भी विभिन्न स्तरों पर कमियां सामने आने की बात कही गई है। ऐसे में नए सीईओ के सामने दान और चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की चुनौती होगी।

दानराशि की गिनती, उसके सुरक्षित रखरखाव, बैंक में जमा करने की प्रक्रिया, रिकॉर्ड प्रबंधन और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी होगी। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना भी प्राथमिकता होगी।

रोजाना लाखों श्रद्धालुओं की दर्शन व्यवस्था

राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में दर्शन व्यवस्था को सुगम और व्यवस्थित बनाना भी नए सीईओ की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा। श्रद्धालुओं को कम से कम असुविधा के साथ रामलला के दर्शन हो सकें, इसके लिए प्रवेश, कतार, पास और निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना होगा।

दर्शन पास को लेकर समय-समय पर सामने आने वाली शिकायतों पर भी प्रभावी निगरानी की जरूरत होगी। विशेष रूप से बुजुर्ग, दिव्यांग, महिला और दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर करना चुनौतीपूर्ण होगा।

साधु-संतों से समन्वय भी अहम

नए सीईओ के सामने अयोध्या के साधु-संतों और धार्मिक संगठनों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी चुनौती होगी। सीईओ व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर सामने आए मतभेदों के बीच जितेंद्र मिश्र को सभी पक्षों का विश्वास हासिल करना होगा।

इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले संतों, धर्माचार्यों और विशिष्ट श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था को लेकर भी स्पष्ट और पारदर्शी प्रोटोकॉल तैयार करना जरूरी होगा।

प्रशासनिक अनुभव आएगा काम

करीब चार दशक तक वायुसेना में सेवा देने वाले जितेंद्र मिश्र के सामने अब धार्मिक आस्था से जुड़े देश के सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से एक की व्यवस्थाओं को संभालने की जिम्मेदारी है। माना जा रहा है कि उनका सैन्य एवं प्रशासनिक अनुभव मंदिर की कार्यप्रणाली में अनुशासन, जवाबदेही और बेहतर समन्वय स्थापित करने में मददगार हो सकता है।

अब उनकी प्राथमिकता वित्तीय पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की जवाबदेही, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और ट्रस्ट के विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर होगी। चढ़ावा चोरी की घटना के बाद उनकी भूमिका मंदिर प्रशासन में भरोसा बहाल करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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