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Tuesday, September 1, 2026
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उत्तराखंड शिक्षकों के तबादलों में ‘कागजी तलाक’, सुगम तैनाती पाने के लिए कर दिया खेल!

देहरादून। शिक्षा विभाग में दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय से तैनात शिक्षकों को सुगम क्षेत्रों में तबादले का लाभ दिलाने के लिए कथित तौर पर नियमों के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ शिक्षिकाओं ने मनचाही तैनाती पाने के लिए पति से ‘कागजी तलाक’ तक का सहारा लिया। हाल ही में हुए 1500 से अधिक शिक्षकों के तबादलों में ऐसे मामलों की जानकारी सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा है। विभागीय अधिकारियों ने मामलों की जांच शुरू करने की बात कही है।

प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों के लिए स्थानांतरण अधिनियम लागू है। इसके तहत इस वर्ष अधिनियम की धारा 17(1)(ख) में निर्धारित पांच श्रेणियों के अंतर्गत अनुरोध के आधार पर तबादले किए गए। इनमें माता-पिता अथवा सास-ससुर की बीमारी, तलाकशुदा होना, विधवा या विधुर होना समेत अन्य परिस्थितियों को आधार बनाया गया।

18-20 साल दुर्गम में सेवा के बाद अपनाया रास्ता

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश में कई शिक्षिकाएं ऐसी हैं, जिन्होंने 18 से 20 वर्ष तक दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दीं, लेकिन सुगम क्षेत्र में तबादला नहीं हो सका। आरोप है कि कुछ मामलों में सुगम तैनाती पाने के लिए पति-पत्नी ने कागजी तौर पर तलाक ले लिया और इसी आधार पर तबादले का लाभ लिया गया।

मामले को लेकर तब सवाल और गंभीर हो गए, जब कथित तौर पर तलाक के बावजूद कुछ पति अपनी शिक्षिका पत्नी को विद्यालय तक छोड़ने पहुंचते देखे गए। विभागीय स्तर पर इसे कथित ‘कागजी तलाक’ की आशंका से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

जांच के बाद कार्रवाई का दावा

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की जानकारी मिलने के बाद उनकी जांच की जा रही है। दस्तावेजों और दावों का सत्यापन कराया जाएगा। यदि किसी शिक्षक या शिक्षिका ने गलत जानकारी अथवा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तबादला हासिल किया है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

20-25 साल से सुगम क्षेत्रों में ही तैनाती

तबादला व्यवस्था को लेकर विभाग में एक दूसरा सवाल भी उठ रहा है। विभाग में कई शिक्षक ऐसे बताए जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी पूरी सेवा सुगम क्षेत्रों में ही पूरी की है। इनमें प्रभावशाली और वीआईपी परिवारों से जुड़े शिक्षकों के साथ ही अन्य शिक्षक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, ऐसे कई शिक्षक पिछले 20 से 25 वर्षों से देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल समेत अन्य जिलों के सुगम क्षेत्र के विद्यालयों में तैनात हैं। वहीं दूसरी ओर कई शिक्षक-शिक्षिकाएं लंबे समय से दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। इससे तबादला नीति की पारदर्शिता और समान अवसर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बीमारी के आधार पर तबादले, अब देना होगा शपथपत्र

इस वर्ष शिक्षा विभाग ने माता-पिता और सास-ससुर की बीमारी को भी अनुरोध आधारित तबादले का आधार बनाया। ऐसे मामलों में तबादला पाने वाली शिक्षिकाओं से अब शपथपत्र लेने की व्यवस्था की गई है। शपथपत्र के जरिए संबंधित शिक्षक को अपने दावे की सत्यता की पुष्टि करनी होगी।

अब निगाह जांच पर

तबादलों में कथित अनियमितताओं और नियमों के दुरुपयोग के आरोपों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में किसी ने फर्जी या महज कागजी परिस्थितियां दिखाकर सुगम तैनाती हासिल की? विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

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